अखिलेश का मोदी सरकार पर हमला, कहा, चुनाव देख बदले बीजेपी के सुर, किसान हितैषी होने का कर रही है दिखावा
अखिलेश यादव ने बीजेपी पर हमला बोलते हुए कहा कि किसानों के उत्पादों के लिए घोषित न्यूनतम समर्थन मूल्य से किसान को कुछ मिलने वाला नहीं है, क्योंकि उसकी अर्थनीति किसान पक्षधर नहीं, कारपोरेट घरानों के हित साधन की है।
सत्ताधारी बीजेपी पर हमला बोलते हुए समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा कि लोकसभा चुनाव करीब आ रहा है, इसलिए बीजेपी किसानों का हितैषी होने का दिखावा करने लगी है।
उन्होंने कहा कि किसानों के उत्पादों के लिए घोषित न्यूनतम समर्थन मूल्य से किसान को कुछ मिलने वाला नहीं है, क्योंकि उसकी अर्थनीति किसान पक्षधर नहीं, कारपोरेट घरानों के हित साधन की है। न्यूनतम समर्थन मूल्य में डेढ़ गुना जोड़ने का जो दावा किया है, वह बीजेपी की दोषपूर्ण आर्थिक नीति को साबित करता है। उन्होंने आगे कहा, “स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट की संस्तुतियों से बीजेपी साफ मुकर गई थी और अब किसानों के समर्थन का ढोंग कर रही है।”
अखिलेश यादव ने आगे कहा, “बीजेपी सरकार में में किसानों की सबसे ज्यादा दुर्दशा है। उसके साथ न्याय नहीं हो रहा है। उसकी जमीन कर्ज में फंसी है, कृषि मंडियों में किसान लुट रहा है, सिंचाई का संकट है। विद्युत आपूर्ति बाधित है, किसान निराशा और कुंठा में आत्महत्या कर रहे हैं। बीजेपी को अन्नदाताओं को धोखा देने में भी कोई गुरेज नहीं है।” उन्होंने आगे कहा कि केंद्र में बीजेपी सरकार का अंतिम साल है, किसानों को लाभ पहुंचाने का ख्याल उसे अब तक क्यों नहीं आया था? अखिलेश यादव ने कहा कि अपने जन्मकाल से ही बीजेपी का किसान और खेत से कोई वास्ता नहीं रहा है, खेतों का वह दूरदर्शन करती आई है।
अखिलेश ने कहा कि उत्तर प्रदेश में ही गन्ना किसानों का लगभग 12238 करोड़ रुपया चीनी मिलों पर बकाया है। कर्जमाफी का वादा बस वादा बनकर ही रह गया है। खाद, ट्रैक्टर, कीटनाशक दवाइयों पर जीएसटी की मार पड़ रही है। केंद्र की बीजेपी सरकार मई, 2017 में सुप्रीम कोर्ट में मान चुकी है कि उसके कार्यकाल में लगभग 40 हजार किसानों ने आत्महत्या की है।
उन्होंने कहा कि सच तो यह है कि साल 2019 में अपने अंधकारमय भविष्य को देखते हुए बीजेपी सीधे-सादे किसानों को बहकाने में लग गई है। बीजेपी का सारा खेल चुनावी संभावनाओं पर आधारित है और इसके नेता समझते हैं कि वे फिर लोगों को अपनी 'ओपियम की पुड़िया' से बहकाने में सफल हो जाएंगे। लेकिन अब उनकी चाल में किसान फंसने वाले नहीं हैं। वे चार साल में बीजेपी का वास्तविक चेहरा पहचान गए हैं।
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