खेती को जड़ से खत्म करने वाले हैं नए कृषि कानून, किसान कमीशन बनाकर दिया जाए किसानों को नियंत्रण - पी साईनाथ

कृषि विशेषज्ञ और वरिष्ठ पत्रकार पी साईनाथ ने कहा है कि मोदी सरकार द्वारा लाए गए कृषि कानून खेती को जड़ से खत्म करने वाले हैं। उन्होंने कहा कि किसान कमीशन बनाकर इसका नियंत्रण किसानों को दिया जाए तभी किसानों का भला होगा।

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अमरीक

वरिष्ठ पत्रकार और कृषि विशेषज्ञ पी साईनाथ ने केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा थोपे गए तीन कृषि अध्यादेशों को रद्द करने की मांग करते हुए कहा है कि देश में किसान कमीशन स्थापित किया जाना चाहिए, जो पूरी तरह से किसानों के सीधे नियंत्रण में हो।

पंजाब के जालंधर स्थित देश भगत यादगार हाल में 30वें 'मेला गदरी बाबयां' में बतौर मुख्य वक्ता आए पी साईनाथ ने कहा कि केंद्र के कृषि अध्यादेश न सिर्फ किसानों को तबाह करेंगे बल्कि इसका नागवार असर देश के बाकी वर्गों पर भी पड़ेगा। उन्होंने देश में आर्थिक असंतुलन के आंकड़े देते हुए कहा कि किसान इस वक्त सबसे बदतर हालात का सामना करने वाला वर्ग हैं। नए खेती कानून पहले ही तबाह हो रही किसानी को जड़ से खत्म करने वाले हैं। समकालीन किसान आंदोलन दुनिया का सबसे बड़ा शांतमय आंदोलन है। इसमें किसान हम सबके लिए संघर्ष कर रहे हैं।

पी साईनाथ ने कहा कि केंद्र की मोदी सरकार ने 2022 तक किसानों की आमदनी दोगुनी करने का वादा किया हुआ है लेकिन हो इससे बिल्कुल उलट रहा है। हकीकत यह है कि किसानों की आमदनी लगातार कम हो रही है तथा बड़े कॉरपोरेट घरानों की आमदनी में बेहद तेजी के साथ इजाफा हो रहा है। उन्होंने हिंदुत्व के सिरमौर बताए जाने वाले सावरकर पर टिप्पणी करते हुए कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह उन्हें सबसे बड़ा देशभक्त बताते हैं, जबकि बीजेपी सावरकर की एक भी ऐसी उपलब्धि नहीं बता सकती जिससे देश के लोग प्रेरणा ले सकें। उन्होंने कहा कि शहीद भगत सिंह और करतार सिंह सराभा सरीखे नौजवान आज भी देश और नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा स्रोत हैं।


साईनाथ ने स्वतंत्रता संग्राम की विरासत की तुलना करते हुए कहा कि सावरकर उस धारा के प्रतिनिधि थे, जो अपनी माफी के एवज में अंग्रेजों के लिए कुछ भी करने को तत्पर थे जबकि 'भगत-सराभा' वाली विरासत में नौजवान इंकलाबी गीत गाते हुए फांसी के फंदे चूमते थे। पी साईनाथ ने कहा कि वह स्वामीनाथन रिपोर्ट का समर्थन करते हैं।

गौरतलब है कि महान और क्रांतिकारी गदर लहर की याद में हर साल जालंधर में मनाया जाने वाला मेला 'गदरी बाबयां दा' ऐतिहासिक महत्व रखता है और इसमें देश-विदेश के बेशुमार लोग शिरकत करते हैं। यहां से निकलीं आवाजें दूर तक जाती हैं। इस बार यह मेला किसान संघर्ष को समर्पित था। हर बार की तरह इस बार भी कई नाटकों का मंचन किया गया और विशाल पुस्तक मेला लगाया गया। मेला दो दिन तक दिन-रात अनवरत चला।

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