असम में राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर (एनआरसी) के पूर्व संयोजक प्रतीक हजेला को अब जांच का सामना करना पड़ेगा। राज्य की बीजेपी सरकार ने एनआरसी अपडेट करने के दौरान कथित अनियमितताओं के लिए आर्थिक अपराध निदेशालय और विजिलेंस में उनके खिलाफ शिकायत की है। प्रतीक हजेला को सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर असम एनआरसी संयोजक नियुक्त किया गया था।
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हालांकि, अगस्त 2019 में एनआरसी सूची प्रकाशित होने के तुरंत बाद शीर्ष अदालत ने ही केंद्र और असम सरकार को हजेला को मध्य प्रदेश में जितना संभव हो उतने लंबे समय तक के लिए स्थानांतरित करने का आदेश दिया था क्योंकि उनके खिलाफ कई शिकायतें दर्ज की गई थीं। उन पर असम में एनआरसी अपडेट करने की कवायद के दौरान बड़े पैमाने पर अनियमितताएं करने के आरोप थे।
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इस बीच मध्य प्रदेश सरकार ने पिछले महीने उन्हें आयुष विभाग के वरिष्ठ सचिव के रूप में उनके कर्तव्यों से मुक्त कर दिया था और उन्हें असम में अपने गृह कैडर में लौटने के लिए कहा था। इस पर असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने बुधवार को कहा कि हजेला को राज्य में अवैध अप्रवासियों को खोजने के इरादे से एनआरसी को अपडेट करते समय कथित रूप से कानून तोड़ने के लिए जांच का सामना करना पड़ेगा।
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साथ ही उन्होंने कहा कि मामले को असम सरकार द्वारा आर्थिक अपराध निदेशालय और सतर्कता निदेशालय को भेज दिया गया है। इस बीच हजेला के असम वापस नहीं आने और वीआरएस लेने की खबरों पर सरमा ने कहा कि अगर वह वीआरएस लेना चाहते हैं, तो वह ले सकते हैं, लेकिन जब भी उन्हें बुलाया जाएगा तो उन्हें जांच दल के सामने उपस्थित होना होगा। हजेला के खिलाफ पहले से ही एनआरसी अभ्यास में कथित अनियमितताओं के कई मामले लंबित रखे गए थे।
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