सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) को ताजमहल की समुचित देखभाल कर पाने में असमर्थ होने को लेकर जमकर फटकार लगाई। कोर्ट ने सख्त लहजे में कहा कि प्रशासन ताजमहल को ठीक से संरक्षित करे, या फिर उसे ढहा दें, नहीं तो कोर्ट उसे बंद कर देगी। कोर्ट ने इस बात पर भी नाराजगी जताई कि यूपी सरकार ताजमहल को संरक्षित करने के लिए विजन दस्तावेज प्रस्तुत करने में विफल रही है।
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जस्टिस एमबी लोकुर और जस्टिस दीपक गुप्ता की पीठ ने कहा कि ताजमहल के संरक्षण के बारे में संसद की स्थायी समिति की रिपोर्ट के बावजूद सरकार ने कोई ठोस कदम नहीं उठाए हैं। उन्होंने कहा कि यह सरासर लापरवाही है। कोर्ट ने कहा, “ताजमहल एफिल टॉवर से ज्यादा सुंदर है और यह देश की विदेशी मुद्रा की समस्या को हल कर सकता है। एफिल टॉवर को 8 करोड़ लोग देखने जाते हैं, जो कि टीवी के एक टॉवर जैसा दिखता है। हमारा ताजमहल बहुत ज्यादा खूबसूरत है। यदि आप इसकी देखभाल करेंगे तो इससे आपकी विदेशी मुद्रा की समस्या हल होगी।”
कोर्ट ने सरकार से पूछते हुए कहा, “क्या आपको इस बात का अहसास है कि आपकी लापरवाही से देश को कितना नुकसान हुआ है?” यूपी सरकार ने इससे पहले खंडपीठ से कहा था कि वह अदालत के समक्ष ताजमहल की सुरक्षा और संरक्षा के लिए एक विजन दस्तावेज प्रस्तुत करेगी।
कोर्ट ने कहा कि वह मामले की अगली सुनवाई 31 जुलाई को दैनिक आधार पर करेगी। खंडपीठ ने केंद्र से उठाए गए कदमों का पूरा विवरण प्रस्तुत करने को कहा और ताजमहल के संरक्षण के इरादे से कार्रवाई करने को कहा।
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कोर्ट ने ताज ट्रेपेजियम जोन (टीटीजेड) के चेयरमैन को जोन में औद्योगिक इकाइयों के विस्तार को रोकने के आदेश के उल्लंघन को लेकर स्पष्टीकरण देने के लिए व्यक्तिगत तौर पर उपस्थिति होने का आदेश दिया। टीटीजेड 10,400 वर्ग किमी का इलाका है, जो उत्तर प्रदेश के आगरा, फिरोजाबाद, मथुरा, हाथरस, एटा और राजस्थान के भरतपुर तक फैला हुआ है।
उत्तर प्रदेश सरकार ने कहा था कि वह ताजमहल के चारों तरफ पर्यावरण की देखभाल की कोशिश कर रही है, जिससे ऐतिहासिक इमारत 400 सालों तक बनी रहे, सिर्फ एक पीढ़ी तक नहीं। कोर्ट पर्यावरणविद एमसी मेहता द्वारा दाखिल याचिका पर सुनवाई कर रही है। मेहता ने प्रदूषणकारी गैसों के प्रभाव से और इलाके में पेड़ों की कटाई रोककर ताज को बचाने की मांग की है।
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