दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार को कड़ी फटकार लगाते हुए कहा है कि न्यायिक आदेशों के बावजूद आपने दिल्ली को जरूरत की 700 मीट्रिक टन ऑक्सीजन उपलब्ध नहीं कराई, ऐसे में आपके खिलाफ क्यों न अवमानना की कार्यवाही की जाए। कोर्ट ने कहा कि "क्या आप आईवरी टॉपर में रह रहे हैं? आप शतुर्मुर्ग की तरह रेत में अपना सिर छिपा सकते हैं, लेकिन हम ऐसा नहीं कर सकते..."
हाईकोर्ट में जस्टिस विपिन सांघी और जस्टिस रेखा पल्ली की डिवीजन बेंच ने यह टिप्पणी उस समय की जब केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट की उस टिप्पणी पर आपत्ति की जिसमें कहा गया था कि दिल्ली को 700 मीट्रिक टन ऑक्सीजन की सप्लाई की जाए। कोर्ट ने केंद्र सरकार को दो वरिष्ठ अधिकारियों को भी तलब किया है और उन्हें कल होने वाली सुनवाई में मौजूद रहने को कहा है।
कोर्ट ने कहा कि दिल्ली के लिए जो 590 मीट्रिक टन का प्रावधान किया गया है, वह तक उपलब्ध नहीं कराया जा रहा है और देश की राजधानी इस कड़वी सच्चाई से रूबरू हो रही है कि लोगों को ऑक्सीजन बेड और आईसीयू बेड नहीं मिल पा रहे हैं।
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हाईकोर्ट ने कहा कि हेल्थकेयर इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ाने के जरूरत है, लेकिन जो पहले से मौजूद सुविधाएं हैं वे चरमरा चुकी हैं। कोर्ट ने कहा कि "यह अवमानना है, इसे हल्के में न लिया जाए। हमें मजबूर मत करो। हम इस मामले में न नहीं सुनने वाले।"
कोर्ट ने केंद्र की उस टिप्पणी पर भी कटाक्ष किया जब दिल्ली के वकील ने कहा कि लोग मर रहे हैं। कोर्ट ने कहा कि यह मामले को बढ़ाने की बात नहीं है, हम आंखें नहीं मूंद सकते।
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